Sunday, October 25, 2009

गोद में गांव को मिलेगी छांव



गोद में गांव को मिलेगी छांव
गोद में बच्चे के पलने की बात तो हम जानते हैं लेकिन अमृतसर जिले में गोद में चार हजार की आबादी पलेगी। जी हां यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। यहां गांव किला जीवन सिंह को विकास के लिए बीबीके डीएवी कालेज व नन्ही छांव फेडरेशन ने गोद ले लिया है। आजादी के बाद से मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहे गांववासियों को अब गोद में प्यार (विकास) की किरण दिखाई देने लगी है। विकास से गांव को जहां चार चांद लगेगा वहीं नन्ही छांव के तहत हरियाली भी फैलेगी। यूं कहें कि अमृतसर-जालंधर जीटी रोड पर दोबुर्जी कस्बे की लिंक रोड पर बसे चार हजार आबादी वाले इस गांव की अब गोद में किस्मत बदलेगी तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। गोद रस्म में पूरा गांव पहुंचा था। विकास की उम्मीद से जहां दिल में खुशी थी वहीं 60 बरस का दर्द भी जुबां पर आ गया। हर किसी ने गांव की समस्याओं को एक-एक कर गिनाया। डीसी काहन सिंह पन्नू, बीबीके डीएवी कालेज की प्रिंसिपल नीलम कामरा, नन्हीं छांव फेडरेशन के चेयरमैन हरपाल सिंह भी इस ऐतिहासिक पल के गांव बने। चार साल का गुरनाम व 90 साल के शिंगारा सिंह की आंखों में एक चमक थी कि गोद लेने से गांव की कायाकल्प होगी। स्कूल अपग्रेड होगा, डिस्पेंसरी खुलेगी और युवाओं को खेल स्टेडियम मिलेगा। बता दें पिछले छह दशक से गांव की महिलाओं, युवतियों व पुरुषों को शौचालय के लिए बाहर जाना पड़ता है। पानी हैंड पंप से मिलता है जो गंदा होता है। पानी की टंकी तो है, लेकिन सप्लाई का इंतजाम नहीं है। गांव की नालियां भी कच्ची हैं। नतीजन गांव में पानी की निकासी न होने से लोगों को बदहाली का जीवन व्यतीत करना पड़ा रहा है। रोजगार भी सबसे बड़ी समस्या है। उच्च शिक्षा न मिलने से अधिकांश युवक दिहाड़ी करने को मजबूर हैं। हालांकि विकास का सपना देखते गांववासियों को 60 बरस बीत गए हैं। अब इनमें एक बार फिर उम्मीद जगी है कि गोद लेने के बाद उनके यह सपने पूरे जरूर पूरे होंगे।

गोद में गांव को मिलेगी छांव
गोद में बच्चे के पलने की बात तो हम जानते हैं लेकिन अमृतसर जिले में गोद में चार हजार की आबादी पलेगी। जी हां यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। यहां गांव किला जीवन सिंह को विकास के लिए बीबीके डीएवी कालेज व नन्ही छांव फेडरेशन ने गोद ले लिया है। आजादी के बाद से मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहे गांववासियों को अब गोद में प्यार (विकास) की किरण दिखाई देने लगी है। विकास से गांव को जहां चार चांद लगेगा वहीं नन्ही छांव के तहत हरियाली भी फैलेगी। यूं कहें कि अमृतसर-जालंधर जीटी रोड पर दोबुर्जी कस्बे की लिंक रोड पर बसे चार हजार आबादी वाले इस गांव की अब गोद में किस्मत बदलेगी तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। गोद रस्म में पूरा गांव पहुंचा था। विकास की उम्मीद से जहां दिल में खुशी थी वहीं 60 बरस का दर्द भी जुबां पर आ गया। हर किसी ने गांव की समस्याओं को एक-एक कर गिनाया। डीसी काहन सिंह पन्नू, बीबीके डीएवी कालेज की प्रिंसिपल नीलम कामरा, नन्हीं छांव फेडरेशन के चेयरमैन हरपाल सिंह भी इस ऐतिहासिक पल के गांव बने। चार साल का गुरनाम व 90 साल के शिंगारा सिंह की आंखों में एक चमक थी कि गोद लेने से गांव की कायाकल्प होगी। स्कूल अपग्रेड होगा, डिस्पेंसरी खुलेगी और युवाओं को खेल स्टेडियम मिलेगा। बता दें पिछले छह दशक से गांव की महिलाओं, युवतियों व पुरुषों को शौचालय के लिए बाहर जाना पड़ता है। पानी हैंड पंप से मिलता है जो गंदा होता है। पानी की टंकी तो है, लेकिन सप्लाई का इंतजाम नहीं है। गांव की नालियां भी कच्ची हैं। नतीजन गांव में पानी की निकासी न होने से लोगों को बदहाली का जीवन व्यतीत करना पड़ा रहा है। रोजगार भी सबसे बड़ी समस्या है। उच्च शिक्षा न मिलने से अधिकांश युवक दिहाड़ी करने को मजबूर हैं। हालांकि विकास का सपना देखते गांववासियों को 60 बरस बीत गए हैं। अब इनमें एक बार फिर उम्मीद जगी है कि गोद लेने के बाद उनके यह सपने पूरे जरूर पूरे होंगे।

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