गैस की कम कीमत क्या जनहित में नहीं?
सुप्रीम कोर्ट ने आरआईएल से पूछा सवालमुकेश अंबानी की कंपनी को करना पड़ा पेचीदे सवालों का सामनानई दिल्ली।अंबानी बंधुओं की कंपनियों के बीच खनिज गैस को लेकर जारी कानूनी जंग में मुकेश समूह की कंपनी आरआईएल को बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में खूब पेचीदा सवालों का सामना करना पड़ा। मामले की सुनवाई कर रही बेंच ने आरआईएल से पूछा कि यह कैसे माना जाए कि अनिल समूह की आरएनआरएल के लिए गैस की कीमत बढ़ाने की उसकी मांग सार्वजनिक हित में है।केजी बेसिन परियोजना की गैस की मांगअदालत ने कहा कि क्या यह सार्वजनिक हित में नहीं है कि सभी को 2.34 डॉलर प्रति इकाई (एमएमबीटीयू) के भाव से गैस की आपूर्ति की जाए। अगर सरकार कहे कि गैस की कीमत सबके लिए 2.34 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू हो तो क्या ऐसा करना सार्वजनिक हित में नहीं होगा? मुख्य न्यायाधीश के जी बालकृष्णन, न्यायमूर्ति आरवी रवींद्रन और पी सदाशिवम की बेंच ने आरआईएल के वकील की दलील पर कहा कि 2.34 डॉलर से बढ़ाकर 4.20 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू किए जाने से सिर्फ (आरआईएल) को फायदा हो रहा है जनता को नहीं। आरएनआरएल आरआईएल से रिलायंस घराने के बंटवारे के समय हुई पारस्परिक सहमति के समझौते के आधार पर सरकार द्वारा तय दर से 44 फीसदी कम दर पर रिलायंस की केजी बेसिन परियोजना की गैस की मांग कर रही है।उत्पादन बंटवारा अनुबंध से नहीं बंधीवरिष्ठ वकील हरीश साल्वे आरआईएल के गैस विपणन के अधिकार पर रिलायंस की ओर से दलील दे रहे थे। पीठ ने कहा कि अगर गैस की आपूर्ति कम कीमत पर होती है तो देश को फायदा होगा। साल्वे ने कहा कि फिलहाल आरआईएल के जामनगर संयंत्र के लिए नौ डालर प्रति एमएमबीटीयू की दर से गैस खरीदी जा रही है और सरकारी कंपनी एनटीपीसी भी इसी तरह पर गैस खरीद रही है। कंपनी उससे गैस खरीद कर उसको किसी कीमत पर बाजार में बेचने के लिए आजाद है क्योंकि गैस खरीदने वाली वाली कंपनी सरकार और रिलायंस के साथ हुए उत्पादन बंटवारा अनुबंध से नहीं बंधी है।
Friday, October 30, 2009
1:17 AM
Posted by
arun singla
Labels: business news
Labels: business news
गैस की कम कीमत क्या जनहित में नहीं?
सुप्रीम कोर्ट ने आरआईएल से पूछा सवालमुकेश अंबानी की कंपनी को करना पड़ा पेचीदे सवालों का सामनानई दिल्ली।अंबानी बंधुओं की कंपनियों के बीच खनिज गैस को लेकर जारी कानूनी जंग में मुकेश समूह की कंपनी आरआईएल को बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में खूब पेचीदा सवालों का सामना करना पड़ा। मामले की सुनवाई कर रही बेंच ने आरआईएल से पूछा कि यह कैसे माना जाए कि अनिल समूह की आरएनआरएल के लिए गैस की कीमत बढ़ाने की उसकी मांग सार्वजनिक हित में है।केजी बेसिन परियोजना की गैस की मांगअदालत ने कहा कि क्या यह सार्वजनिक हित में नहीं है कि सभी को 2.34 डॉलर प्रति इकाई (एमएमबीटीयू) के भाव से गैस की आपूर्ति की जाए। अगर सरकार कहे कि गैस की कीमत सबके लिए 2.34 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू हो तो क्या ऐसा करना सार्वजनिक हित में नहीं होगा? मुख्य न्यायाधीश के जी बालकृष्णन, न्यायमूर्ति आरवी रवींद्रन और पी सदाशिवम की बेंच ने आरआईएल के वकील की दलील पर कहा कि 2.34 डॉलर से बढ़ाकर 4.20 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू किए जाने से सिर्फ (आरआईएल) को फायदा हो रहा है जनता को नहीं। आरएनआरएल आरआईएल से रिलायंस घराने के बंटवारे के समय हुई पारस्परिक सहमति के समझौते के आधार पर सरकार द्वारा तय दर से 44 फीसदी कम दर पर रिलायंस की केजी बेसिन परियोजना की गैस की मांग कर रही है।उत्पादन बंटवारा अनुबंध से नहीं बंधीवरिष्ठ वकील हरीश साल्वे आरआईएल के गैस विपणन के अधिकार पर रिलायंस की ओर से दलील दे रहे थे। पीठ ने कहा कि अगर गैस की आपूर्ति कम कीमत पर होती है तो देश को फायदा होगा। साल्वे ने कहा कि फिलहाल आरआईएल के जामनगर संयंत्र के लिए नौ डालर प्रति एमएमबीटीयू की दर से गैस खरीदी जा रही है और सरकारी कंपनी एनटीपीसी भी इसी तरह पर गैस खरीद रही है। कंपनी उससे गैस खरीद कर उसको किसी कीमत पर बाजार में बेचने के लिए आजाद है क्योंकि गैस खरीदने वाली वाली कंपनी सरकार और रिलायंस के साथ हुए उत्पादन बंटवारा अनुबंध से नहीं बंधी है।
सुप्रीम कोर्ट ने आरआईएल से पूछा सवालमुकेश अंबानी की कंपनी को करना पड़ा पेचीदे सवालों का सामनानई दिल्ली।अंबानी बंधुओं की कंपनियों के बीच खनिज गैस को लेकर जारी कानूनी जंग में मुकेश समूह की कंपनी आरआईएल को बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में खूब पेचीदा सवालों का सामना करना पड़ा। मामले की सुनवाई कर रही बेंच ने आरआईएल से पूछा कि यह कैसे माना जाए कि अनिल समूह की आरएनआरएल के लिए गैस की कीमत बढ़ाने की उसकी मांग सार्वजनिक हित में है।केजी बेसिन परियोजना की गैस की मांगअदालत ने कहा कि क्या यह सार्वजनिक हित में नहीं है कि सभी को 2.34 डॉलर प्रति इकाई (एमएमबीटीयू) के भाव से गैस की आपूर्ति की जाए। अगर सरकार कहे कि गैस की कीमत सबके लिए 2.34 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू हो तो क्या ऐसा करना सार्वजनिक हित में नहीं होगा? मुख्य न्यायाधीश के जी बालकृष्णन, न्यायमूर्ति आरवी रवींद्रन और पी सदाशिवम की बेंच ने आरआईएल के वकील की दलील पर कहा कि 2.34 डॉलर से बढ़ाकर 4.20 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू किए जाने से सिर्फ (आरआईएल) को फायदा हो रहा है जनता को नहीं। आरएनआरएल आरआईएल से रिलायंस घराने के बंटवारे के समय हुई पारस्परिक सहमति के समझौते के आधार पर सरकार द्वारा तय दर से 44 फीसदी कम दर पर रिलायंस की केजी बेसिन परियोजना की गैस की मांग कर रही है।उत्पादन बंटवारा अनुबंध से नहीं बंधीवरिष्ठ वकील हरीश साल्वे आरआईएल के गैस विपणन के अधिकार पर रिलायंस की ओर से दलील दे रहे थे। पीठ ने कहा कि अगर गैस की आपूर्ति कम कीमत पर होती है तो देश को फायदा होगा। साल्वे ने कहा कि फिलहाल आरआईएल के जामनगर संयंत्र के लिए नौ डालर प्रति एमएमबीटीयू की दर से गैस खरीदी जा रही है और सरकारी कंपनी एनटीपीसी भी इसी तरह पर गैस खरीद रही है। कंपनी उससे गैस खरीद कर उसको किसी कीमत पर बाजार में बेचने के लिए आजाद है क्योंकि गैस खरीदने वाली वाली कंपनी सरकार और रिलायंस के साथ हुए उत्पादन बंटवारा अनुबंध से नहीं बंधी है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
0 comments:
Post a Comment