Tuesday, September 15, 2009

सीमा पर चीन से भिधन्त



डबवाली न्यूज़ (अरुण सिंगला) 1962 के युद्ध के बाद पहली बार चली गोली,सिक्किम के केरांग में आईटीबीपी के 2 जवान घायल... नई दिल्ली, 15 सितंबर। 1962 के युद्ध के बाद पहली बार भारत और चीन के बीच सीमा पर फायरिंग हुई है जिसमें चीनी सैनिकों की गोली से इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस दो जवान गंभीर घायल हो गए हैं। सरकार ने इस खतरनाक घटना को छुपाए रखा है लेकिन खुफिया विभाग के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने इसकी पुष्टि की है। उत्तरी सिक्किम के चीन से लगे केरांग इलाके में यह फायरिंग 15 दिन पहले हुई थी लेकिन इसे मीडिया से छिपाया गया। 1996 की चीन-भारत संधि के बाद यह सीमा पर पहली तीखी झड़प है। इस संधि में दोनों देश विश्वास बहाल करने के उपायों के तौर पर इस बात पर एकमत थे कि चाहे कितना भी उकसाया जाए दोनों तरफ से गोली किसी भी स्थिति में नहीं चलनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक सिक्किम के भीतर 2।1 किलोमीटर के इलाके पर दबाव बनाने के लिए यह चीन की ताजा कोशिश है। पिछले साल इसी इलाके में चीन ने भारतीय सीमा के एक किलोमीटर अंदर तक अपने सैनिकों से लदे गश्ती वाहन भेजे थे। केरांग शूटआउट के बाद 30 अगस्त को अचानक सीमा अधिकारियों की बैठक करनी पड़ी थी। यही नहीं, पिछले हफ्ते थलसेना अध्यक्ष जनरल दीपक कपूर की मौजूदगी में कोलकाता के फोर्ट विलियम स्थित पूर्वी कमान मुख्यालय में पूर्वी कमान के उच्चाधिकारियों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उपजे हालात का नए सिरे से जायजा लेते हुए युद्ध रणनीति की समीक्षा की थी।सीमा का उल्लंघन दोनों के देशों के बीच नई बात नहीं क्योंकि पहाड़ी इलाका होने के कारण सीमा स्पष्ट नहीं है लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी की घटना 1962 के युद्ध के बाद पहली बार हुई है। वहीं, दूसरी ओर, वास्तविक सीमा रेखा के उस पार चीन ने पिछले वर्षों में सड़क सहित कई मूलभूत सुविधाओं का विस्तार कर लिया। इससे भारत की समस्याएं और बढ़ गईं जबकि भारतीय क्षेत्र में 50 किलोमीटर तक कोई संपर्क का साधन नहीं है।

डबवाली न्यूज़ (अरुण सिंगला) 1962 के युद्ध के बाद पहली बार चली गोली,सिक्किम के केरांग में आईटीबीपी के 2 जवान घायल... नई दिल्ली, 15 सितंबर। 1962 के युद्ध के बाद पहली बार भारत और चीन के बीच सीमा पर फायरिंग हुई है जिसमें चीनी सैनिकों की गोली से इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस दो जवान गंभीर घायल हो गए हैं। सरकार ने इस खतरनाक घटना को छुपाए रखा है लेकिन खुफिया विभाग के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने इसकी पुष्टि की है। उत्तरी सिक्किम के चीन से लगे केरांग इलाके में यह फायरिंग 15 दिन पहले हुई थी लेकिन इसे मीडिया से छिपाया गया। 1996 की चीन-भारत संधि के बाद यह सीमा पर पहली तीखी झड़प है। इस संधि में दोनों देश विश्वास बहाल करने के उपायों के तौर पर इस बात पर एकमत थे कि चाहे कितना भी उकसाया जाए दोनों तरफ से गोली किसी भी स्थिति में नहीं चलनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक सिक्किम के भीतर 2।1 किलोमीटर के इलाके पर दबाव बनाने के लिए यह चीन की ताजा कोशिश है। पिछले साल इसी इलाके में चीन ने भारतीय सीमा के एक किलोमीटर अंदर तक अपने सैनिकों से लदे गश्ती वाहन भेजे थे। केरांग शूटआउट के बाद 30 अगस्त को अचानक सीमा अधिकारियों की बैठक करनी पड़ी थी। यही नहीं, पिछले हफ्ते थलसेना अध्यक्ष जनरल दीपक कपूर की मौजूदगी में कोलकाता के फोर्ट विलियम स्थित पूर्वी कमान मुख्यालय में पूर्वी कमान के उच्चाधिकारियों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उपजे हालात का नए सिरे से जायजा लेते हुए युद्ध रणनीति की समीक्षा की थी।सीमा का उल्लंघन दोनों के देशों के बीच नई बात नहीं क्योंकि पहाड़ी इलाका होने के कारण सीमा स्पष्ट नहीं है लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी की घटना 1962 के युद्ध के बाद पहली बार हुई है। वहीं, दूसरी ओर, वास्तविक सीमा रेखा के उस पार चीन ने पिछले वर्षों में सड़क सहित कई मूलभूत सुविधाओं का विस्तार कर लिया। इससे भारत की समस्याएं और बढ़ गईं जबकि भारतीय क्षेत्र में 50 किलोमीटर तक कोई संपर्क का साधन नहीं है।

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